Monday, 27 February 2017

शिलाजीत भी इसके आगे फेल, यह चीज खाते ही पुरुषों में आ जाएगी ताकत

आयुर्वेद में सेहत का खजाना छुपा है। अक्सर ही लोग नादानियों के चलते शारीरिक शक्ति व क्षमता खो देते हैं, ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है, हम आपको ऐसी ताकतवर खुराक की रेसिपी बताने जा रहे हैं जिसे खाने से आपमें शक्ति लौटेगी। यकीन मानिए राजा महाराजा भी इस चीज को खाया करते थे। यहां पढ़ें उड़द दाल के लड्डू बनाने की आसानी रेसिपी –

सामग्री –

उड़द दाल – 400 ग्रसम
घी – 400 ग्राम
छोटी इलाइची – 10
पिस्ते – 10 ग्राम
काजू, किशमिश, बादाम – 100 ग्राम
बूरा या मिसी हुई मिश्री – 300 से 400 ग्राम

ऐसे बनाएं

– उड़द दाल को साफ कर तीन से चार घंटे के लिए पानी में भिगो दें।
– भीगी हुई दाल को हल्का मोटा पील सें और कढ़ाई में देसी घी में लगातार चमचे से चलाते हुए भून लें।
– दाल को ब्राउन होने तक भूनें, इसमें थोड़ा समय लग सकता है।
– अब गैस बंद कर दें और भुनी हुई दाल में बूरा मिला लें।
– इसमें बारीक कटे काजू, बादाम, पिस्ता, इलाइची पाउडर डाल कर मिलाएं।
– अब लड्डू बनाने के लिए मिश्रण तैयार है। मिश्रण को दोनों हाथों में लेकर मुट्ठी बनाते हुए छोटे छोटे लड्डू बनाएं और एयरटाइट कंटेनर में भर कर रख लें।
– एक लड्डू रोज सुबह खाली पेट गर्म दूध के साथ खाएं, शारीर की कमजोरी दूर होगी और दिमाग को ठंडक मिलेगी।


Thursday, 5 January 2017

आइये जाने फालसे के फायदे Health Benefits of Phalsa or Falsa Fruit (CalorieBee)



फालसा (ग्रेविया एशियाटिका) गर्मियों के लोकप्रिय फलों में से एक है अपने अनोखे स्वाद की वजह से इसे हर कोई पसंद करता है । इसकी तासीर ठंडी होने से यह हमारे शरीर को ठंडक पहुंचाता है । फालसा छोटे छोटे गोल-मटोल बेर के आकार के गहरे बैंगनी रंग के नरम और रसीले जिनका स्वाद खट्-मिट्ठा होता है । फालसा खनिज लवण जैसे मैग्नीशियम, पोटेशियम, सोडियम, फाॅस्फोरस, कैल्शियम , लोहा, साथ ही प्रोटीन, कार्बोहाइडेट,विटामिन ए और सी और एंटीआॅक्सीडेंट से भरपूर होता है ।

खटठे मीठे स्वाद वाले फालसे के फल में विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है । इसके साथ ही सिट्रिक एसिड, एमीनो एसिड, ग्रेवियानोल, बीटा एमिरिदीन, बेट्यूलीन, फ्रेडीलिन, किम्फेराल, क्वेरसेटिन, ल्यूपिनोन, ल्यूपियाल, डेल्फीनिडीन, सायनीडीन, टेरेक्सास्टेरोल पाये जाते हैं।

आइये जाने फालसे के फायदे

  1. पेट का शूलः सिकी हुई 3 ग्राम अजवायन में फालसे का 25 से 30 ग्राम रस डालकर थोड़ा सा गर्म करके पीने से पेट का शूल मिटता है।
  2. दिमाग की कमजोरीः कुछ दिनों तक नाश्ते के स्थान पर फालसे का रस उपयुक्त मात्रा में पीने से दिमाग की कमजोरी एवं सुस्ती दूर होती है, फुर्ती और शक्ति पैदा होती है।
  3. श्वास, हिचकी, कफः कफदोष से होने वाले श्वास, सर्दी तथा हिचकी में फालसे का रस थोड़ा गर्म करके उसमें थोड़ा अदरक का रस एवं सेंधा नमक डालकर पीने से कफ बाहर निकल जाता है तथा सर्दी, श्वास की तकलीफ एवं हिचकी मिट जाती है।
  4. हृदय की कमजोरीः फालसे का रस, नींबू का रस, 1 चुटकी सेंधा नमक, 1-2 काली मिर्च लेकर उसमें स्वादानुसार मिश्री मिलाकर पीने से हृदय की कमजोरी में लाभ होता है।
  5. पेट की कमजोरीः पके फालसे के रस में गुलाब जल एवं मिश्री मिलाकर रोज पीने से पेट की कमजोरी दूर होती है एवं उलटी उदरशूल, उबकाई आना आदि तकलीफें दूर होती हैं एवं रक्तदोष भी मिटता है।
  6. पित्तविकारः गर्मी के दोष, नेत्रदाह, मूत्रदाह, छाती या पेट में दाह, खट्टी डकार आदि की तकलीफ में फालसे के रस का शरबत बनाकर पीना तथा उष्ण-तीक्ष्ण खुराक बंद कर केवल सात्त्विक खुराक लेने से पित्तविकार मिटते हैं और अधिक तृषा से भी राहत मिलती है।
  7. हीमोग्लोबिन: फालसे में खनिज लवणों की अधिकता होने के कारण इसके नियमित सेवन से रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार होता है। इससे एनीमिया का खतरा कम हो जाता है।
  8. कैंसर: वैज्ञानिक शोधों से साबित हो चुका है कि फालसा में रेडियोधर्मी क्षमता होती है, जिसके चलते फालसा में मौजूद पोषक तत्व कैंसर से लड़ने के मूल्यवान स्त्रोत हैं।
  9. फालसे में गर्मी के मौसम में लू लगने और उससे होने वाले बुखार से बचने का कारगर इलाज है। यह मस्तिष्क की गर्मी और खुष्की दूर करके तरोताजा रखता है। चिड़चिड़ापन दूर करता है। उल्टी और घबराहट दूर करता है।
  10. यह ज्यादा धूप में रहने के कारण शरीर के खुले अंगों पर होने वाली लालिमा, जलन, सूजन और कालेपन के इलाज में मदद करता है।
  11. इसमें मौजूद विटामिन सी शरीर में लोहे के अवशोषण में मदद करता है, जिससे रक्त को साफ करके रक्त विकारों पर काबू पाने में मदद मिलती है।
  12. विटामिन सी, खनिज लवण और एंटीऑक्सीडेंट तत्वों से भरपूर फालसा के सेवन से रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे हृदय के रोग का खतरा कम हो जाता है।
  13. यह पेशाब की जलन मिटाने में बहुत सहायक रहता है और दिल की कार्यक्षमता बढाने की शक्ति रखता है।
  14. फालसा पेड़ की पत्तियां और तने भी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं  त्वचा के कटने, छिलने, जलने, दर्दनाक चकते पड़ने, फोड़े होने, एक्जिमा, त्वचा संबंधी रोगों में फालसा की पत्तियों  को रात भर भिगोने के बाद पीस कर लगाने से बहुत लाभ होता है ।
  15. फालसा गर्मियों में पित्तनाशक व गर्मीनाशक माना जाता है। फालसा खाने से यौवन शक्ति में वृद्धि होती है।

बार बार पेशाब होने की समस्या से मुक्ति पाने का घरेलु नुस्खा Too Much Urination Problem

100 वृद्ध महिलाओं को झुक कर खांसने के लिए कहा जाए, तो हम पाएँगे कि उनमें 80-90 प्रतिशत का पेशाब निकल गया है | पेशाब की मात्रा अलग-अलग हो सकती है की यह एक काफी आम समस्या है | इसके लिए जिस चिकित्सय शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, वह है – ‘इन्कोन्टीनेन्स’ | इसका अर्थ है मूत्रमार्ग से आपकी मर्जी के खिलाफ पेशाब निकलना और आपका उसे रोक पाने से असमर्थ रहना |

जानिए पेशाब बनने का तरीका

शरीर के विभिन्न अंगों और ऊतकों की निरंतर सक्रियता के कारण हमारा शरीर अपशिष्ट पदार्थ पैदा करता है | उदर के पिछले हिस्से में पसलियों के नीचे स्थित गुर्दे इन अपशिष्टों को खून और पेशाब में से छानते हैं | पेशाब मूत्राशय में एकत्रित हो जाता है | जब यह आधे पिंट (24,436 क्यूबिक इंच) के आसपास एकत्रित हो जाता है, तो मूत्रत्याग की इच्छा पैदा होती है | यदि आसपास कोई टॉयलेट नहीं है या आप किसी काम में व्यस्त है, तो ऐसी स्थितियों में मस्तिष्क की इच्छा दबा लेता है | जब एकत्रित मूत्र की मात्रा एक पिंट या इससे ज्यादा हो जाती है आर पेशाब करना ही पड़ता है | पेशाब करने के लिए तैयार हो जाने के बाद, मस्तिष्क मूत्राशय को सिकुड़ने और मूत्रमार्ग को खुलने का सन्देश देता है और पेशाब बाहर आ जाता है | सामान्य व्यक्ति आम तौर पर दिन में 4-7 और रात में 1-2 बार पेशाब करता है |

पेशाब बाहर क्यों आता है

पेट से संबंधित समस्याओं, विशेषकर कब्ज, के कारण मूत्राशय से पेशाब रिस सकता है, क्योंकि मूत्राशय और मूत्रमार्ग का द्वार, गर्भाशय तथा योनि (जननांग) व मलपथ (मलाशय) को सहारा देने वाली मांसपेशियां एक ही होती हैं | एक रास्ते सहारे और क्रियाकलाप में गड़बड़ होने से दूसरे ऐसा रास्तों का सहारा और कार्य भी प्रभावित होते हैं |

पेशाब नियंत्रण अक्षमता के प्रकार

  1. टॉयलेट सीट पर बैठने या वहाँ तक पहुँचने से पहले ही मूत्रत्याग की गहरी इच्छा के कारण भी ऐसा होता है | टॉयलेट के नल से बहते पानी के कारण भी पेशाब करने की गहन इच्छा पैदा हो सकती है और पेशाब की कुछ बूँद रिस सकती है |
    3 मिश्रित नियंत्रण अक्षमता : जब उपरोक्त कारण एक से अधिक संख्या में मौजूद हों |
  2. दबाव जनित अनियंत्रण मूत्रमार्ग (यूरिथ्रा) के कमजोर होने के कारण होता है | आम तौर पर यह शिशु जन्म के कारण होता है, जब सहारा देने वाली मांसपेशियां खिंच/ जख्मी हो कर कमजोर हो जाती हैं | कमजोरी आम तौर पर मासिक धर्म रूक जाने (मिनोपौज) पर हर्मोस की कमी से पैदा होती है | मोटापे से भी मांसपेशियां पर दबाव बढ़ जाता है |
  3. समान्यता: उम्र बढ़ने के साथ मूत्राशय मनमाने ढंग से व्यवहार करने लगता है | चेतावनी देने की आवधि कम होती जाती है और मूत्राशय को ज्यादा बार खाली करने की जरूरत महसूस होने लगती है | जब यह एक समस्या बन जाती है और पेशाब इच्छा के विरूद्ध रिसने लगता है, तब मदद की जरूरत होती है | कभी – कभी संक्रमण, मूत्राशय में पथरी या कैंसर, एल्जिमर रोग, पार्किन्सोनिज्म (दोनों ही मस्तिष्क संबंधी रोग हैं), स्ट्रोक और मल्टीपल सिक्लेराइसिस (बहुल ऊतक-दृढ़न) के कारण भी पेशाब को नियंत्रित करने की अक्षमता पैदा हो सकती है | इनसे मूत्र – अनियंत्रण के अतिरिक्त अन्य समस्याएँ भी पैदा हो सकती हैं – जैसे, बार – बार पेशाब आना, मूत्रत्याग की गहरी इच्छा होना और नोक्टूरियायानी रातों को कई बार पेशाब जाना |

घरेलु नुस्खे


  1. कुलथी का प्रयोग कुलथी में कैल्‍शियम, आयरन और पॉलीफिनॉल होता है, जो कि एंटीऑक्‍सीडेंट से भरा होता है। थोड़ी सी कुलथी को गुड के साथ रोज सुबह लेने से मूत्राशय की खराबी दूर हो जाएगी।
  2. शहद और तुलसी एक चम्‍मच शहद के साथ 3-4 तुलसी की पत्‍तियां मिलाएं और खाली पेट सुबह खाएं।
  3. मेथी मेथी पावडर को सूखी अदरक और शहद के साथ मिला कर पानी के साथ खाएं। ऐसा हर दो दिन पर करें। आपको रिजल्‍ट साफ दिखाई देगा।
  4. बेकिंग सोडा यह पेशाब के पीएच बैलेंस को नियंत्रित करेगा। आधा चम्‍मच बेकिंग सोडा को 1 गिलास पानी के साथ मिक्‍स कर के पियें
  5. खूब पानी पियें आप जितना ज्‍यादा पानी पियेंगी आपका शरीर उतना ही ज्‍यादा हाइड्रेट रहेगा और किडनी से गंदगी निकलेगी। एक पुरुष को लगभग 3 लीटर पानी हर दिन पीना चाहिये।
  6. विटामिन सी अधिक मात्रा में लें। विटामिन सी पेशाब में अम्लता को बढ़ाता है; जीवाणु अम्लीय परिवेश में नहीं बढ़ सकते हैं।
  7. अनार पेस्‍ट यह मूत्राशय की गर्मी को कम करता है। अनार के छिलके का पेस्‍ट बनाइये और उसका छोटा भाग पानी के साथ दिन में दो बार खाइये। ऐसा 5 दिनों के लिये करें, आपको इससे आराम मिलेगा।
  8. तिल के बीज तिल के दानों में एंटी ऑक्‍सीडेंट्स, मिनरल्‍स और विटामिन्‍स होते हैं। आप इसे गुड या फिर अजवाइन के साथ सेवन कर सकते हैं।
  9. दही दही को हर रोज खाने के साथ खाना चाहिये। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक ब्‍लैडर में खतरनाक बैक्‍टीरिया को बढ़ने से रोकता है।
  10. आवश्‍यक तेल चंदन, लोबान और टी ट्री ऑइल जैसे आवश्यक तेलों से अपने प्राइवेट पार्ट की मालिश करने से उस जगह की जलन और बार बार पेशाब आने की परेशानी खतम होती है। बेस्‍ट रिजल्‍ट के लिये अरोमा थैरेपिस्‍ट की सलाह लें।

feeling of having to urinate frequently, natural remedies for frequent urination, natural remedies for frequent urination in children, natural remedies for frequent urination in males, needing to urinate frequently, remedies for frequent urination at night, remedies for frequent urination during pregnancy, urge to urinate frequently, 

Friday, 30 December 2016

सर्दी के मौसम में खाएंगे अलसी के लड्डू, नहीं होंगी ये बीमारियां Amazing benifit of Alsi ke-Laddu in winter-season

अलसी में मौजूद घुलनशील फाइबर प्राकृतिक रुप से आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाता है 

 सर्दी के मौसम में सर्दी, जुकाम, हाथ-पैंरों और जोड़ों में दर्द की समस्या कई लोगों को होती है। इस मौसम में हमे गर्मागम चीजें अच्छी लगती है। सर्दियों में आप अपने खाने के शेयड्यूल में कुछ बदलाव करके इन बीमारियों से बच सकते है। सर्दी के मौसम में खुद को गर्म रखने के लिए गर्म तासीर वाला भोजन करना बहुत जरूरी है। आज हम आपको ऐसी एक स्वादिष्ट खाने की चीज के बारे में बताने जा रहे है जो आपको स्वाद को बढ़ाने के साथ-साथ शरीर के लिए भी काफी फायदेमंद है।

अलसी के नियमित सेवन से नहीं होती कब्ज, खांसी
वो स्वादिष्ट चीज है अलसी के लड्डू। सर्दी के मौसम में असली के लड्डू का सेवन हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक है। सर्दियों में रोज सुबह अलसी के लड्डू खाने से बॉडी को ताजगी और स्फूर्ति का अहसास होता है। यह हमारी बॉडी को इतनी ताकत देता है कि इस मौसम में होने वाली कई बीमारियों तो यूं ही गायब हो जाती है। इसके अलावा इसके नियमित सेवन से आप कब्ज, खांसी आदि बीमारियों से बचे रहते हैं। यहीं नहीं अलसी शरीर के अंदर मौजूद अतिरिक्त फैट कम करने में असरदार है।

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाता है अलसी
यह हमारे बॉडी के वजन को नियंत्रित करने का भी काम करती है। अलसी में मौजूद घुलनशील फाइबर प्राकृतिक रुप से आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाता है। अलसी में अल्फा लाइनोइक एसिड अर्थराइटिस, अस्थमा, डायबिटीज और कैंसर से लडऩे में मदद करता है। इसके अलावा अलसी के लड्डू में ओमेगा-3 फैटी एसिड पया जाता है जो कि हमारी बॉडी को इन बीमारियों से लडऩे की ताकत देता है। इस तरह आप अलसी के लड्डू खाकर अपने आप सर्दियों में इस तरह की कई बीमारियों से बचा सकते हैं।

गर्भावस्था में ऐसा हो आपका आहार Diet-Fitness-in-Pregnancy follow this diet chart

गर्भवती महिला को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह जो भी खाती हैं उससे बच्चे को पोषण मिलता है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ आहार का सेवन करना चाहिए 




मांं बनने का अहसास ही अनोखा होता है। गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान अपने खान-पान का खास ध्यान रखना चाहिए। गर्भवती महिला को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह जो भी खाती हैं उससे बच्चे को पोषण मिलता है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ आहार का सेवन करना चाहिए। न्यूट्रिशनिस्ट तमन्ना नारंग ने गर्भवती महिलाओं के आहार के संबंध में ये सुझाव दिए हैं :

प्रोटीन : गर्भावस्था के दौरान बच्चे और प्लेसेंटा के विकास के लिए प्रोटीन युक्त आहार जरूर लेना चाहिए। यह जी मिचलाने और थकान से भी लडऩे में मददगार है। महिला को कितना प्रोटीन लेना चाहिए, यह महिला के वजन पर निर्भर करता है। सी फूड, लीन मीट, दाल, अंडा, दूध, बीन्स, अनसाल्टेड नट और सीड्स इसका अच्छा स्रोत है।

उपयोगी सुझाव : 90 प्रतिशत गर्भवती भारतीय महिलाओं में प्रोटीन की कमी है। प्रोटीन की मात्रा या कमी से संबंधित जानकारी के लिए पोषण विशेषज्ञ से संपर्क करें। चिकित्सक भी प्रोटान से संबंधित खुराक के बारे में बता सकते हैं।

आयरन : आयरन खून की कमी और संक्रमण से बचाता है। यह बच्चे और उसके दिमाग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पूरे गर्भावस्था के दौरान और अतिरिक्त रूप से 760 मिलीग्राम आयरन की जरूरत होती है। लीन मीट, स्किनलेश चिकन, मछली अच्छी तरह से पके अंडे, दाल, हरे पत्तीदार सब्जियां, फलियां, मेवा और अनाज आदि आयरन के अच्छे स्रोत हैं।

उपयोगी सुझाव : शरीर में अच्छी तरह से आयरन की आपूर्ति के लिए विटामिन सी युक्त फलों का भोजन के साथ या भोजन करने के फौरन बाद सेवन करें। चाय पीने के एक घंटे बाद या एक घंटे पहले आयरन से समृद्ध आहार लेने से बचें।

कैल्शियम : मां के खून में कैल्शियम की आपूर्ति होने से बच्चे के शरीर की हड्डियां अच्छी तरह से विकसित होती है। बच्चे के दिल, नसों और मांसपेशियों का विकास कैल्शियम पर निर्भर करता है, अगर मां कैल्शियम को पर्याप्त मात्रा में नहीं ले रही है तो फिर उसकी हड्डियों के भी कमजोर होने की संभावना बढ़ जाती है। गर्भावस्था के दौरान रोजाना 200 मिलीग्राम कैल्शियम युक्त आहार लेना चाहिए। कम वसा वाले डेयरी उत्पाद (स्किम्ड मिल्क, पनीर, दही), खाने लायक हड्डियां युक्त मछलियां जैसे सार्डिन, टोफू, नाश्ते में अंकुरित अनाज, ब्रेड, रोटी, साबूत बादाम, संतरे, सूखे मेवे जैसे अखरोट और हरी पत्तेदार सब्जियां कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं।

उपयोगी सुझाव : कैल्शियम सबसे जरूरी खुराक है। यह गर्भावस्था के दौरान मां की पोषण की जरूरतों को पूरा करता है। पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी लेने से भी शरीर में कैल्शियम की

आपूर्ति होती है। 

Thursday, 24 November 2016

अमरूद के सेवन से मिलने वाले 15 फायदे 15 Benefits Arising From the Use of Guava

अमरूद में विटामिन सी और शर्करा काफी मात्रा में होती है। अमरूद में पेक्टिन की मात्रा भी बहुत अधिक होती है। अमरूद को इसके बीजों के साथ खाना अत्यंत उपयोगी होता है, जिसके कारण पेट साफ रहता है। अमरूद का उपयोग चटनियां, जेली, मुरब्बा और फल से पनीर बनाने में किया जाता है। आइए जानते हैं कि आखिर ठंड में अमरूद खाने के क्या फायदे हो सकते हैं।

अमरूद के सेवन से मिलने वाले 15 फायदे


  1. अमरूद हाई एनर्जी फ्रूट है जिसमें भरपूर मात्रा में विटामिन और मिनरल्‍स पाए जाते हैं। ये तत्व हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं।
  2. डीएनए को सुधारे अमरूद में पाया जाने वाला विटामिन बी-9 शरीर की कोशिकाओं और डीएनए को सुधारने का काम करता है।
  3. दिल का साथी अमरूद में मौजूद पोटैशियम और मैग्‍नीशियम दिल और मांसपेशियों को दुरुस्‍त रखकर उन्‍हें कई बीमारियों से बचाता है।
  4. अगर आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना चाहते हैं तो अमरूद का सेवन करना बहुत फायदेमंद होगा।
  5. अमरूद के नियमित सेवन से सर्दी जुकाम जैसी समस्‍याओं के होने का खतरा कम हो जाता है।
  6. अमरूद में पाया जाने वाला विटामिन ए और ई आंखों, बालों और त्‍वचा को पोषण देता है।
  7. अमरूद में मौजूद लाइकोपीन नामक फाइटो न्‍यूट्र‍िएंट्स शरीर को कैंसर और ट्यूमर के खतरे से बचाने में सहायक होते हैं।
  8. अमरूद में बीटा कैरोटीन होता है जो शरीर को त्‍वचा संबंधी बीमारियों से बचाता है।
  9. अमरूद का नियमित सेवन करने से कब्‍ज की समस्‍या में राहत मिलती है।
  10. फल के साथ ही अमरूद की पत्तियों का सेवन मुंह के छालों को दूर करने में कारगर होता है।
  11. अमरूद का रायता, चटनी, अचार और शेक खाने का स्‍वाद बढ़ा देते हैं।
  12. अमरूद मेटाबॉलिज्‍म को सही रखता है जिससे शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर नियंत्रित रहता है।
  13. कच्‍चे अमरूद में पके अमरूद की अपेक्षा विटामिन सी अधिक पाया जाता है। इसलिए कच्‍चा अमरूद खाना ज्‍यादा फायदेमंद होता है।
  14. अमरूद में फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है इसलिए यह डायबिटिज के मरीजों के लिए बहुत अच्‍छा होता है।
  15. थायरॉइडनॉर्मल थायरॉइड में भी डॉक्‍टर अमरूद खाने की सलाह देते हैं।


पेटदर्द
अमरूद के पेड़ की पत्तियों को बारीक पीसकर काले नमक के साथ चाटने से लाभ होता है। अमरूद के फल की फुगनी (अमरूद के फल के नीचे वाले छोटे पत्ते) में थोड़ा-सी मात्रा में सेंधानमक को मिलाकर गुनगुने पानी के साथ पीने से पेट में दर्द समाप्त होता है। यदि पेट दर्द की शिकायत हो तो अमरूद की कोमल पत्तियों को पीसकर पानी में मिलाकर पीने से आराम होता है।

अपच
अपच, अग्निमान्द्य और अफारा के लिए अमरूद बहुत ही उत्तम औषधि है। इन रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को 250 ग्राम अमरूद भोजन करने के बाद खाना चाहिए। जिन लोगों को कब्ज न हो तो उन्हें खाना खाने से पहले खाना चाहिए।

बवासीर
सुबह खाली पेट 200-300 ग्राम अमरूद नियमित रूप से सेवन करने से बवासीर में लाभ मिलता है। कुछ दिनों तक रोजाना सुबह खाली पेट 250 ग्राम अमरूद खाने से भी बवासीर ठीक हो जाती है। बवासीर को दूर करने के लिए सुबह खाली पेट अमरूद खाना उत्तम है। मल-त्याग करते समय बांयें पैर पर जोर देकर बैठें। इस प्रयोग से बवासीर नहीं होती है और मल साफ आता है। पके अमरुद खाने से पेट का कब्ज खत्म होता है, जिससे बवासीर रोग दूर हो जाता है।

कब्ज
अच्छी किस्म के तरोताजा बड़े-बड़े अमरूद लेकर उसके छिलकों को निकालकर टुकड़े कर लें और धीमी आग पर पानी में उबालें। जब अमरूद आधे पककर नरम हो जाएं, तब नीचे उतारकर कपड़े में डालकर पानी निकाल लें। उसके बाद उससे 3 गुना शक्कर लेकर उसकी चासनी बनायें और अमरूद के टुकड़े उसमें डाल दें। फिर उसमें इलायची के दानों का चूर्ण और केसर इच्छानुसार डालकर मुरब्बा बनायें। ठंडा होने पर इस मुरब्बे को चीनी-मिट्टी के बर्तन में भरकर, उसका मुंह बंद करके थोड़े दिन तक रख छोड़े। यह मुरब्बा 20-25 ग्राम की मात्रा में रोजाना खाने से कब्जियत दूर होती है।

खांसी
एक कच्चे अमरूद को लेकर चाकू से कुरेदकर उसका थोड़ा-सा गूदा निकाल लेते हैं। फिर इस अमरूद में पिसी हुई अजवायन तथा पिसा हुआ कालानमक 6-6 ग्राम की मात्रा में लेकर भर देते हैं। इसके बाद अमरूद पर कपड़ा लपेटकर उसमें गीली मिट्टी का लेप चढ़ाकर आग में भून लेते हैं पकने के बाद इसके ऊपर से मिट्टी और कपड़ा हटाकर अमरूद को पीस लेते हैं। इसे आधा-आधा ग्राम की मात्रा में शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम रोगी को चटाने से काली खांसी में लाभ होता है।

जल्द घाव भरना
अमरूद की कोमल पत्तियां उबालकर पीने से पुराने दस्तों का रोग ठीक हो जाता है। दस्तों में आंव आती रहे, आंतों में सूजन आ जाए, घाव हो जाए तो 2-3 महीने लगातार 250 ग्राम अमरूद रोजाना खाते रहने से दस्तों में लाभ होता है। अमरूद में-टैनिक एसिड होता है, जिसका प्रधान काम घाव भरना है। इससे आंतों के घाव भरकर आंते स्वस्थ हो जाती हैं।

अमरूद कब हो सकता है हानिकारक

शीत प्रकृति वालों को और जिनका आमाशय कमजोर हो, उनके लिए अमरूद हानिकारक होता है। बारिश के सीजन में अमरूद के अंदर सूक्ष्म धागे जैसे सफेद कीडे़ पैदा हो जाते हैं जिसे खाने वाले व्यक्ति को पेट दर्द, अफारा, हैजा जैसे विकार हो सकते हैं। हालांकि ठंड में ताजे अमरूद खाने से फायदेमंद होते हैं, लेकिन यदि कुछ दिन तक पुराने हो जाए तो नहीं खाना चाहिए। इसके बीज सख्म होने के कारण आसानी से नहीं पचते और यदि ये एपेन्डिक्स में चले जाए, तो रोग पैदा कर सकते हैं। अत: इनके बीजों के सेवन से बचना चाहिए। 

Wednesday, 16 November 2016

गुणों से मालामाल मूली

ताजी व कोमल मूली, त्रिदोषशामक, जठराग्निवर्धक व उत्तम पाचक है | गर्मियों में इसका सेवन लाभकारी है | इसका कंद, पत्ते, बीज सभी औषधीय गुणों से सम्पन्न हैं | ताजी व कोमल मूली ही खानी चाहिए | पुरानी, सख्त व मोटी मूली त्रिदोषप्रकोपक, भारी एवम रोगकारक होती है |
इसके १०० ग्राम पत्तों में ३४० मि.ग्रा. कैल्शियम, ११० मि.ग्रा. फास्फोरस व ८.८ मि.ग्रा. लोह तत्त्व पाया जाता है | प्रचुर मात्रा में निहित ये खनिज तत्त्व दाँत एवं हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और रक्त को बढ़ाते हैं | इसके पत्ते सलाद के रूप में अथवा सब्ब्जी बनाकर भी खाये जा सकते हैं | पत्तों के रस का भी सेवन किया जाता हैं | इसके पत्ते गुर्दे के रोग, मूत्र-संबंधी विकार, उच्च रक्तचाप, मोटापा, बवासीर व पाचन-संबंधी गड़बड़ियों में खूब लाभदायी हैं |
गर्मी में अधिक पसीना आने से शारीर में सोडियम की मात्रा कम हो जाती है | मूली में ३३ मि.ग्रा. सोडियम पाया जाता है, अत: मूली खाने से इसकी आपूर्ति सहजता से हो जाती है और थकान भी मिट जाती है |

पत्ते भी हैं फायदेमंद-

अक्सर लोग मूली खाकर उसके पत्तों को फेंक देते हैं, जबकि पत्तों में भी स्वाद तथा काफी मात्र में पोषक तत्व होते हैं। उन्हें भूजी- सब्जियां, पराठों में प्रयोग करें। इसमें पतली-पतली फलियां भी आती हैं, जिसे मोंगर या मोंगरा के नाम से जाना जाता है। इन फलियों की सब्जियां बहुत स्वादिष्ट बनती हैं। हमेशा छोटी, पतली तथा ताजा मूली का ही प्रयोग करें।
हड्डियों को मजबूती दे-
मूली खाने से शरीर की विषैली गैस (कार्बन डाई ऑक्साइड) का निष्कासन होता है तथा जीवनदायी ऑक्सीजन की प्राप्ति होती है। मूली खाने से दांत मंसूड़े मजबूत होते हैं, हड्डियों में मजबूती आती है। थकान मिटाने और नींद लाने में भी मूली सहायक है।
पीलिया में फायदेमंद-
यह उच्च रक्तचाप, बवासीर की तकलीफ में लाभकारी है। इसका रस निकाल पीने से मूत्र रोगों में भी लाभ होता है। पीलिया रोग में ताजा मूली का प्रयोग बहुत ही उपयोगी है।
मोटापा से मुक्ति दिलाए-
आज की महाबीमारी मोटापा से परेशान हैं तो इसके रस में नींबू व नमक मिला कर नियमित सेवन करें, लाभ होगा। सिर में जूं पड़ रही हो तो इसका रस पानी में मिला कर धोएं।
हीमोग्लोबिन की कमी दूर करे-
मूली के रस में सामान मात्र में अनार का रस मिला कर पीने से हीमोग्लोबिन बढ़ता है।
दांतों को चमकाए-
इसके खाने से रक्तविकार दूर होते हैं। त्वचा के दाग धब्बे हटते हैं। दांतों पर पीलापन हो तो मूली के टुकड़े पर नींबू का रस लगाकर दांतों पर धीरे-धीरे मलने से दांत साफ होंगे। इसके अलावा मूली को काट कर नींबू लगा कर छोटे छोटे टुकड़े दांतों से काट कर धीरे-धीरे चबाएं। थोड़ी देर बाद उगल दें। ऐसा नियमित रूप से करने से दांतों पर चढ़ी पीली परतें हट जाएंगी।
पायरिया से राहत-
पायरिया से परेशान लोग मूली के रस से दिन में 2-3 बार कुल्ले करें और इसका रस पिएं तो लाभ होगा। मूली के रस से कुल्ले करना, मसूड़ों-दांतों पर मलना और पीना दांतों के लिये बहुत लाभकारी है। मूली को चबा-चबा कर खाना दांतों व मसूड़ों को निरोग करता है।
कब्ज से राहत दिलाए-
कब्ज से परेशान हैं तो मूली पर नींबू व नमक लगा कर सवेरे खाएं, लाभ होगा। भोजन में मूली सलाद के रूप में लें तो और लाभ होगा। सुबह-शाम मूली का रस पीने से पुराने कब्ज में भी लाभ होता है। इस दौरान तला-भूना भोजन न खाएं, बल्कि खिचड़ी, दलिया आदि खाएं।
पेट-दर्द में कारगर
पेट-दर्द परेशान करे तो मूली का रस नींबू मिला कर पिएं या मूली का अचार खाएं।
मुंह की दुर्गन्ध दूर करे -
मुंह से गंध आती हो तो मूली के पत्तों पर सेंधा नमक मिला कर सवेरे-सवेरे
रोज खाएं। दुर्गन्ध नष्ट होगी।
चेहरा दमकाए, खूबसूरत बनाएहम सभी खूबसूरत दिखना चाहते हैं लेकिन मुंहासे और झाईयां चेहरे की खूबसूरती छीन लेती हैं। अगर आप इससे मुक्ति के लिए काफी प्रयास कर चुके हैं तो इस बार मूली को आजमा कर देखें, लाभ होगा। मुंहासों के लिए मूली का टुकड़ा गोल काट कर मुंहासों पर लगाएं और तब तक लगाए रखें, जब तक यह खुश्क न हो जाए। थोड़ी देर बाद चेहरे को ठण्डे पानी से धो लें, काफी लाभ होगा। मुंहासे निकलना खून की खराबी का लक्षण है। मूली के सेवन से इस समस्या से मुक्ति मिलती है।

Wednesday, 9 November 2016

इन फूड्स को खाने के बाद नहीं पड़ेगी वियाग्रा की जरुरत

सेक्सुअल लाइफ को अगर आप और ज्यादा एंज्वॉय करना चाहते हैं, तो ऐसे फूड को खाएं जो आपकी स्टेमिना को बढ़ाए। इन फूड का सेवन करने से न सिर्फ आपकी सेक्सुअल लाइफ पर पॉजिटिव असर पड़ेगा, बल्कि अलग से सेक्सुअल एक्सपीरियंस भी बेहतर और अलग होगा।

जाने क्या खाकर आप बढ़ा सकेंगे अपनी सेक्स पावर-

अवोकैडो- बेहतर सेक्स लाइफ के लिए विटामिन बी-6 और फॉलिक एसिड की जरूरत होती है। फॉलिक एसिड बॉडी को एनर्जी से पूरा करता है तो वहीं विटामिन बी-6 हॉर्मोंस को स्थिर बनाता है। अवोकैडो में यह दोनों ही चीजें पाई जाती हैं।

केला- इसके अंदर प्रचुर मात्रा में ब्रोमेलिन पाया जाता है, जो कामेच्छा को बढ़ाने में आपकी मदद करता है। रीबोफ्लैविन और पौटेशियम एनर्जी लेवल को बढ़ाने में मदद करता है।

स्ट्रॉबेरीज, पीच और बेरीज- इन सभी फलों में बीज में जिंक होता है जो सेक्स को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाती है। जिंक महिलाओं को सेक्स के लिए मानसिक रूप से तैयार करती है। जबकि पुरुषों में जिंक टेस्टोस्टोरेन को कंट्रोल करता है, जो स्पर्म के प्रॉडक्शन को बढ़ाता है।

अंडा- इसमें विटामिन बी-6 बी-5 के पावरहाउस होते हैं जो स्ट्रेस को घटाता है। इसके साथ ही महिलाओं और पुरुष दोनों में सेक्स की इच्छा को जगाता है।

अजवाइन- इसमें एल्डेस्टेरोन पाया जाता है जो महिलाओं में सेक्स करने के मूड को बनाती है।

डार्क चॉकलेट- डार्क चॉकलेट में सीरोटोनिन और एंडोरफिंस होता है, जो आपके मूड को सेक्स के प्रति और एक्साइटेड करती है।

ड्राई फ्रूट्स और नट्स- नट्स में आर्जीनिन होता है, जो ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाकर धमनियों को राहत पहुंचाने का काम करता है। वहीं बादाम में पाया जाने वाला अमीनो एसिड इरेक्शन को बेहतर करने में मदद करता है।

अंजीर- इसमें अमीनो एसिड्स के सबसे अच्छे स्रोत होते हैं, जो आपकी सेक्स की इच्छा को और बढ़ा देती है। इसको खाने से स्टैमिना भी बढ़ती है।

लहसुन- इसमें कोमोत्तेजक गुण पाए जाते हैं, जो ब्लड सर्कुलेशन और सेक्सुअल परफॉर्मेंस को बढ़ाता है। ध्यान दें कि इसका सेवन ज्यादा न करें।

Thursday, 27 October 2016

दो लोगों का प्यार किस-किस मोड़ से गुज़रता है, दर्शाती हैं ये Sex Positions

ज़िन्दगी को बिना प्यार के सोच कर देखिए. सोचिए अगर आपका कोई लाइफ पार्टनर न होता, शादी न होती. ज़ाहिर सी बात है अगर शादी न होती तो आप ये पढ़ने के लिए इस दुनिया में न होते. ​किसी भी दूसरे सुख की तरह भौतिक सुख भी ज़िन्दगी में बेहद ज़रूरी है. दिनभर की फर्जी चकल्ल्स, काम और टेंशन से उभरने के लिए ज़िन्दगी में रोमांस और प्यार ज़रूरी है. कहते हैं जिसकी सेक्स लाइफ अच्छी होती है उसका जीवन बेहद खुशहाल होता है. तो आपके जीवन को खुशियों से भरने के लिए हम लाए हैं दुनिया की सबसे रोमांटिक Sex Positions की लिस्ट.





















संभल कर! सभी पोजिशंस ट्राई करने से पहले अपनी बॉडी फिट ज़रूर कर लीजिएगा.

Saturday, 15 October 2016

Magical Drink For Weight Loss - मोटी से मोटी तोंद घटाएँ अब चुटकीयों में,रात में सिर्फ 1 ग्लास इस जादुई जूस का पिए, और फिर कमाल देखें

हम लोग अक्सर अपनी निकलती हुई तोंद (belly fat) से परेशान रहते हैं और उसे कम करने के लिए कई तरह के जतन करते हैं। लेकिन अब आपको बहुत ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे आप इस आसान से बनने वाले जूस का सोने से पहले सेवन करके कर सकते हैं तोंद को गुड-बाय। चाहे मोटी से मोटी तोंद ही क्यों ना हो सिर्फ 1 ग्लास रात को पीने से वो हो जायेगी फुटबॉल से गेंद।
सोने से पहले खीरे के जूस का सेवन करें। खीरे का जूस पेट को साफ करता है। इसके साथ ही यह फैट भी नहीं बढ़ाता है। इसमें कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है और और आपकी निकलती हुई तोंद को कंट्रोल (weight loss) करने में काफी लाभदायक होता है।

➡ खीरे के जूस 🍹 की सामग्री :
– दो खीरे  🍆🍆
– दो छोटे चम्मच नींबू का रस  🍋🍋
– अदरक का एक छोटा टुकड़ा  🍗🍗
– दो छोटे चम्मच चीनी  🍚
– एक छोटा चम्मच- भुना जीरा पाउडर 🍜
– तीन से चार पुदीना पत्ती 🌿
– काला व सफेद नमक स्वादानुसार 🍚
➡ खीरे का जूस 🍹

 बनाने की विधि :
खीरे को धोलें और छोटा छोटा काट कर छिलके सहित जूसर में डालें। अदरक और पुदीना भी जूसर में डाल दें और जूस निकाल लें। इसमें चीनी, नींबू का रस, भुना जीरा पाउडर, काला व सफेद नमक स्वादानुसार डालकर अच्छी तरह हिलाएं। फिर 1 ग्लास झट से गटक (पीना) जाए और इसका कमाल देखे, देखते ही देखते तोंद हो जायेगी फिट एंड फाइन।

#Kheera water, #Cucumber Juice, Zira water for weight loss, motapa ghatao chutkiyon mein,cumin seeds for weight loss, cumin seeds for health, get flat tummy,
Miracle Drink To Reduce the Belly Fat in 7 Days - Homemade slimming tea. Lose Weight In 7 Days. 7 दिन मे आसानी से वजन घटायें. Lose weight easily without dieting and without exercise, How to lose belly fat. Fat burner drink recipe to lose 10 kg in 5 days, Fat loss diet plan for 15 days to lose 5 kg, How to get slim in 5 days. Instant Belly Fat Loss Diet, pet ka motapa kam karne ke gharelu upay, How to get flat tummy. How to lose weight fast in 10 days. Instant weight loss Home Remedy. Weight loss diet drink, Home remedy for flat tummy Miracle remedy for weight loss. how to lose belly fat. Healthcare, Health solutions with cucumber, Instant weight loss, reduce belly fat with cucumber juice, Magical drink for weight loss, Miracle drink to burn belly fat, Energy drink, Energy booster, Immune booster, #Detoxification, #purification Amazing Health Benefits